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PSIR नोट्स — हिंदी
नीचे प्रत्येक बिंदु का पाठ UPSC की आधिकारिक हिंदी अधिसूचना का यथावत् पाठ है (राजनीति विज्ञान एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंध, परीक्षा नोटिस सं. 05/2026)। टॉपिक पर क्लिक करने से उसका हिंदी नोट खुलता है। नोट्स की पारिभाषिक शब्दावली IGNOU एम.ए. (MPS) हिंदी सामग्री के अनुसार है।
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प्रश्न पत्र – I · भाग A — राजनैतिक सिद्धांत एवं भारतीय राजनीति
1राजनैतिक सिद्धांत : अर्थ एवं उपागम :
राजनैतिक सिद्धांत : अर्थ एवं उपागम
2राज्य के सिद्धांत : उदारवादी, नवउदारवादी, मार्क्सवादी, बहुवादी, पश्च-उपनिवेशी एवं नारी-अधिकारवादी।
राज्य का उदारवादी सिद्धांतराज्य का नवउदारवादी सिद्धांतराज्य का मार्क्सवादी सिद्धांतराज्य का बहुवादी सिद्धांतराज्य का पश्च-उपनिवेशी सिद्धांतराज्य का नारी-अधिकारवादी सिद्धांत
3न्याय : रॉल के न्याय के सिद्धांत के विशेष संदर्भ में न्याय के संप्रत्यय एवं इसके समुदायवादी समालोचक।
न्याय के संप्रत्ययरॉल का न्याय-सिद्धांतरॉल के समुदायवादी समालोचक
4समानता : सामाजिक, राजनैतिक एवं आर्थिक, समानता एवं स्वतंत्रता के बीच संबंध, सकारात्मक कार्य।
सामाजिक, राजनैतिक एवं आर्थिक समानतासमानता एवं स्वतंत्रता के बीच संबंधसकारात्मक कार्य
5अधिकार: अर्थ एवं सिद्धांत, विभिन्न प्रकार के अधिकार, मानवाधिकार की संकल्पना।
अधिकार : अर्थ एवं सिद्धांतविभिन्न प्रकार के अधिकारमानवाधिकार की संकल्पना
6लोकतंत्र: क्लासिकी एवं समकालीन सिद्धांत, लोकतंत्र के विभिन्न मॉडल-प्रतिनिधिक, सहभागी एवं विमर्शी।
लोकतंत्र के क्लासिकी एवं समकालीन सिद्धांतप्रतिनिधिक लोकतंत्रसहभागी लोकतंत्रविमर्शी लोकतंत्र
7शक्ति, प्राधान्य, विचारधारा एवं वैधता की संकल्पना।
शक्ति की संकल्पनाप्राधान्य (हेजेमनी)विचारधारावैधता
8राजनैतिक विचारधाराएं: उदारवाद, समाजवाद, मार्क्सवाद, फासीवाद, गांधीवाद एवं नारी-अधिकारवाद।
उदारवादसमाजवादमार्क्सवादफासीवादगांधीवादनारी-अधिकारवाद (नारीवाद)
9भारतीय राजनैतिक चिंतन: धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र एवं बौद्ध परंपराएं, सर सैयद अहमद खान, श्री अरविंद, एम.के. गांधी, बी.आर. अम्बेडकर, एम.एन. रॉय।
धर्मशास्त्रअर्थशास्त्रबौद्ध परंपराएंसर सैयद अहमद खानश्री अरविंदएम.के. गांधीबी.आर. अम्बेडकरएम.एन. रॉय
10पाश्चात्य राजनैतिक चिंतन: प्लेटो अरस्तु, मैकियावेली, हॉब्स, लॉक, जॉन एस. मिल, मार्क्स, ग्राम्स्की, हान्ना आरेन्ट।
प्लेटोअरस्तुमैकियावेलीहॉब्सलॉकजॉन एस. मिलमार्क्सग्राम्स्कीहान्ना आरेन्ट
प्रश्न पत्र – I · भाग B — भारतीय शासन एवं राजनीति
1भारतीय राष्ट्रवाद : (क) भारत के स्वाधीनता संग्राम की राजनैतिक कार्यनीतियां : संविधानवाद से जन सत्याग्रह, असहयोग, सविनय अवज्ञा एवं भारत छोड़ो, उग्रवादी एवं क्रांतिकारी आंदोलन, किसान एवं कामगार आंदोलन। (ख) भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के परिप्रेक्ष्य: उदारवादी, समाजवादी एवं मार्क्सवादी, उग्रमानवतावादी एवं दलित।
संविधानवाद से जन सत्याग्रहअसहयोगसविनय अवज्ञाउग्रवादी एवं क्रांतिकारी आंदोलनकिसान एवं कामगार आंदोलनराष्ट्रीय आंदोलन का उदारवादी परिप्रेक्ष्यराष्ट्रीय आंदोलन के समाजवादी एवं मार्क्सवादी परिप्रेक्ष्यराष्ट्रीय आंदोलन का उग्रमानवतावादी परिप्रेक्ष्यराष्ट्रीय आंदोलन का दलित परिप्रेक्ष्य
2भारत के संविधान का निर्माण : ब्रिटिश शासन का रिक्थ, विभिन्न सामाजिक एवं राजनैतिक परिप्रेक्ष्य।
ब्रिटिश शासन का रिक्थसंविधान पर विभिन्न सामाजिक एवं राजनैतिक परिप्रेक्ष्य
3भारत के संविधान की प्रमुख विशेषताएं: प्रस्तावना, मौलिक अधिकार तथा कर्त्तव्य, नीति निर्देशक सिद्धांत, संसदीय प्रणाली एवं संशोधन प्रक्रिया, न्यायिक पुनर्विलोकन एवं मूल संरचना सिद्धांत।
प्रस्तावनामौलिक अधिकार तथा कर्त्तव्यनीति निर्देशक सिद्धांतसंसदीय प्रणालीसंशोधन प्रक्रियान्यायिक पुनर्विलोकन एवं मूल संरचना सिद्धांत
4(क) संघ सरकार के प्रधान अंग: कार्यपालिका, विधायिका एवं सर्वोच्च न्यायालय की विचारित भूमिका एवं वास्तविक कार्यप्रणाली। (ख) राज्य सरकार के प्रधान अंग: कार्यपालिका, विधायिका एवं उच्च न्यायालयों की विचारित भूमिका एवं वास्तविक कार्यप्रणाली।
संघ कार्यपालिकासंघ विधायिकासर्वोच्च न्यायालयराज्य कार्यपालिकाराज्य विधायिकाउच्च न्यायालय
5आधारिक लोकतंत्र: पंचायती राज एवं नगर शासन, 73वें एवं 74वें संशोधनों का महत्व, आधारिक आंदोलन।
पंचायती राजनगर शासन73वें एवं 74वें संशोधनआधारिक आंदोलन
6नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, वित्त आयोग, संघ लोक सेवा आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जातियां आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजातियां आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग।
निर्वाचन आयोगनियंत्रक एवं महालेखा परीक्षकवित्त आयोगसंघ लोक सेवा आयोगराष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोगराष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोगराष्ट्रीय महिला आयोगराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोगराष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोगराष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग
7संघ राज्य पद्धति : सांविधानिक उपबंध, केंद्र राज्य संबंधों का बदलता स्वरूप, एकीकरणवादी प्रवृत्तियां एवं क्षेत्रीय आकांक्षाएं, अंतर-राज्य विवाद।
संघ राज्य पद्धति के सांविधानिक उपबंधकेंद्र-राज्य संबंधों का बदलता स्वरूपएकीकरणवादी प्रवृत्तियां एवं क्षेत्रीय आकांक्षाएंअंतर-राज्य विवाद
8योजना एवं आर्थिक विकास: नेहरूवादी एवं गांधीवादी परिप्रेक्ष्य, योजना की भूमिका एवं निजी क्षेत्र, हरित क्रांति, भूमि सुधार एवं कृषि संबंध, उदारीकरण एवं आर्थिक सुधार।
नेहरूवादी एवं गांधीवादी परिप्रेक्ष्ययोजना एवं सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिकाहरित क्रांति, भूमि सुधार एवं कृषि संबंधउदारीकरण एवं आर्थिक सुधार
9भारतीय राजनीति में जाति, धर्म एवं नृजातीयता।
भारतीय राजनीति में जातिभारतीय राजनीति में धर्मभारतीय राजनीति में नृजातीयता
10दल प्रणाली: राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय राजनैतिक दल, दलों के वैचारिक एवं सामाजिक आधार, बहुदलीय राजनीति के स्वरूप, दबाव समूह, निर्वाचक आचरण की प्रवृत्तियां, विधायकों के बदलते सामाजिक-आर्थिक स्वरूप।
राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय राजनैतिक दलदलों के वैचारिक एवं सामाजिक आधारगठबंधन राजनीति के स्वरूपदबाव समूहनिर्वाचक आचरण की प्रवृत्तियांविधायकों का बदलता सामाजिक-आर्थिक स्वरूप
11सामाजिक आंदोलन: नागरिक स्वतंत्रताएं एवं मानवाधिकार आंदोलन, महिला आंदोलन पर्यावरण आंदोलन
नागरिक स्वतंत्रता एवं मानवाधिकार आंदोलनमहिला आंदोलनपर्यावरण आंदोलन
प्रश्न पत्र – II · भाग A — तुलनात्मक राजनैतिक विश्लेषण एवं अंतर्राष्ट्रीय राजनीति
1तुलनात्मक राजनीति: स्वरूप एवं प्रमुख उपागम, राजनैतिक अर्थव्यवस्था एवं राजनैतिक समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य; तुलनात्मक प्रक्रिया की सीमाएं।
तुलनात्मक राजनीति : स्वरूप एवं प्रमुख उपागमराजनैतिक अर्थव्यवस्था एवं राजनैतिक समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्यतुलनात्मक पद्धति की सीमाएं
2तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य में राज्य; पूंजीवादी एवं समाजवादी अर्थव्यवस्थाओं में राज्य के बदलते स्वरूप एवं उनकी विशेषताएं तथा उन्नत औद्योगिक एवं विकासशील समाज।
पूंजीवादी एवं समाजवादी अर्थव्यवस्थाओं में राज्यउन्नत औद्योगिक एवं विकासशील समाजों में राज्य
3राजनैतिक प्रतिनिधान एवं सहभागिता : उन्नत औद्योगिक एवं विकासशील समाजों में राजनैतिक दल, दबाव समूह एवं सामाजिक आंदोलन।
तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य में राजनैतिक दलतुलनात्मक परिप्रेक्ष्य में दबाव समूहतुलनात्मक परिप्रेक्ष्य में सामाजिक आंदोलन
4भूमंडलीकरण: विकसित एवं विकासशील समाजों से प्राप्त अनुक्रियाएं।
भूमंडलीकरण : विकसित एवं विकासशील समाजों की अनुक्रियाएं
5अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के अध्ययन के उपागम; आदर्शवादी, यथार्थवादी, मार्क्सवादी, प्रकार्यवादी एवं प्रणाली सिद्धांत।
आदर्शवादी उपागमयथार्थवादी उपागममार्क्सवादी उपागमप्रकार्यवादी उपागमप्रणाली सिद्धांत
6अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में आधारभूत संकल्पनाएं; राष्ट्रीय हित, सुरक्षा एवं शक्ति, शक्ति संतुलन एवं प्रतिरोध; पर-राष्ट्रीय कर्ता एवं सामूहिक सुरक्षा; विश्व पूंजीवादी अर्थव्यवस्था एवं भूमंडलीकरण।
राष्ट्रीय हित, सुरक्षा एवं शक्तिशक्ति संतुलन एवं प्रतिरोधपर-राष्ट्रीय कर्ता एवं सामूहिक सुरक्षाविश्व पूंजीवादी अर्थव्यवस्था एवं भूमंडलीकरण
7बदलती अंतर्राष्ट्रीय राजनीति व्यवस्था: महाशक्तियों का उदय, कार्यनीतिक एवं वैचारिक द्विधुरीयता, शस्त्रीकरण की होड़ एवं शीत युद्ध, नाभिकीय खतरा। गुट-निरपेक्ष आंदोलन। सोवियत संघ का विघटन।
महाशक्तियों का उदय, द्विध्रुवीयता, शस्त्रीकरण की होड़ एवं शीत युद्धगुट-निरपेक्ष आंदोलन : लक्ष्य एवं उपलब्धियांसोवियत संघ का विघटन, एकध्रुवीयता एवं अमेरिकी वर्चस्व
8अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था का उद्भव : ब्रेटनवुड से विश्व व्यापार संगठन तक। समाजवादी अर्थव्यवस्थाएं तथा पारस्परिक आर्थिक सहायता परिषद (CMEA); नव अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की तृतीय विश्व की मांग : विश्व अर्थव्यवस्था का भूमंडलीकरण।
ब्रेटनवुड से विश्व व्यापार संगठन तकसमाजवादी अर्थव्यवस्थाएं तथा पारस्परिक आर्थिक सहायता परिषद (CMEA)नव अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की तृतीय विश्व की मांगविश्व अर्थव्यवस्था का भूमंडलीकरण
9संयुक्त राष्ट्र : विचारित भूमिका एवं वास्तविक लेखा-जोखा; विशेषीकृत संयुक्त राष्ट्र अभिकरण-लक्ष्य एवं कार्यकरण; संयुक्त राष्ट्र सुधारों की आवश्यकता।
संयुक्त राष्ट्र : विचारित भूमिका एवं वास्तविक लेखा-जोखाविशेषीकृत संयुक्त राष्ट्र अभिकरणसंयुक्त राष्ट्र सुधारों की आवश्यकता
10विश्व राजनीति का क्षेत्रीकरण : EU, ASEAN, APEC, SAARC, NAFTA
यूरोपीय संघ (EU)ASEANAPECSAARCNAFTA
11समकालीन वैश्विक सरोकार : लोकतंत्र, मानवाधिकार, पर्यावरण, लिंग न्याय, आतंकवाद, नाभिकीय प्रसार।
वैश्विक सरोकार के रूप में लोकतंत्रमानवाधिकारपर्यावरणलिंग न्यायआतंकवादनाभिकीय प्रसार
प्रश्न पत्र – II · भाग B — भारत तथा विश्व
1भारत की विदेश नीति: विदेश नीति के निर्धारक, नीति निर्माण की संस्थाएं, निरंतरता एवं परिवर्तन
विदेश नीति के निर्धारकनीति निर्माण की संस्थाएंभारतीय विदेश नीति में निरंतरता एवं परिवर्तन
2गुट निरपेक्षता आंदोलन को भारत का योगदान: विभिन्न चरण, वर्तमान भूमिका
भारत और गुट-निरपेक्ष आंदोलन : विभिन्न चरणभारत और गुट-निरपेक्ष आंदोलन : वर्तमान भूमिका
3भारत और दक्षिण एशिया : (क) क्षेत्रीय सहयोग : एसएएआरसी – पिछले निष्पादन एवं भावी प्रत्याशाएं (ख) दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार क्षेत्र के रूप में (ग) भारत की पूर्व अभिमुखन नीति (घ) क्षेत्रीय सहयोग की बाधाएं: नदी जल विवाद: अवैध सीमा पार उत्प्रवासन, नृजातीय द्वंद्व एवं उपप्ल्व, सीमा विवाद
भारत और दक्षिण एशिया : पड़ोसी देशSAARC : पिछला निष्पादन एवं भावी प्रत्याशाएंदक्षिण एशिया मुक्त व्यापार क्षेत्र के रूप मेंभारत की पूर्व अभिमुखन (लुक ईस्ट) नीतिनदी जल विवादअवैध सीमा-पार उत्प्रवासननृजातीय द्वंद्व एवं उपप्लवसीमा विवाद
4भारत एवं वैश्विक दक्षिण : अफ्रीका एवं लातीनी अमेरिका के साथ संबंध, NIEO एवं WTO वार्ताओं के लिए आवश्यक नेतृत्व की भूमिका।
भारत और अफ्रीकाभारत और लातीनी अमेरिकाNIEO एवं WTO वार्ताओं में नेतृत्व की भूमिका
5भारत एवं वैश्विक शक्ति केंद्र: संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप संघ (EU), जापान, चीन और रूस।
भारत और संयुक्त राज्य अमेरिकाभारत और यूरोपीय संघ (EU)भारत और जापानभारत और चीनभारत और रूस
6भारत एवं संयुक्त राष्ट्र प्रणाली : संयुक्त राष्ट्र शांति अनुरक्षण में भूमिका, सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग।
संयुक्त राष्ट्र शांति अनुरक्षण में भूमिकासुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग
7भारत एवं नाभिकीय प्रश्न : बदलते प्रत्यक्षण एवं नीति।
भारत एवं नाभिकीय प्रश्न
8भारतीय विदेश नीति में हाल के विकास: अफगानिस्तान में हाल के संकट पर भारत की स्थिति, इराक एवं पश्चिम एशिया, U S एवं इजराइल के साथ बढ़ते संबंध, नई विश्व व्यवस्था की दृष्टि।
अफगानिस्तान, इराक एवं पश्चिम एशियाUS एवं इजराइल के साथ बढ़ते संबंधनई विश्व व्यवस्था की दृष्टि
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