PSIR की तैयारी — हिंदी माध्यम की रणनीति
राजनीति विज्ञान एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंध (PSIR) मुख्य परीक्षा का वैकल्पिक विषय है — दो प्रश्नपत्र, प्रत्येक 250 अंक। इसका पाठ्यक्रम सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-2 के राजव्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय संबंध खंडों से सीधा मेल खाता है, और निबंध के अनेक विषय इसी सामग्री से लिखे जाते हैं। नीचे का क्रम हिंदी माध्यम के अभ्यर्थी के लिए है — स्रोत, चरण और उत्तर-लेखन, तीनों।
पाठ्यक्रम की संरचना
UPSC की हिंदी अधिसूचना के अनुसार चार खंड हैं। पूरा आधिकारिक हिंदी पाठ्यक्रम, बिंदुवार, नोट्स-सूची पर दिया गया है।
स्रोत — रंग-संकेत के साथ
चार स्तर हैं — आधार, विस्तार, प्रचलित पुस्तकें और अभ्यास। पुस्तकें आधार देती हैं; उनका विषय-वार संकलन और प्रतिदिन का समसामयिक अद्यतन, दोनों इसी मंच पर चलते रहते हैं — यह व्यवस्था नीचे हर स्तर के साथ दर्ज है।
ऊपर के स्रोतों का विषय-वार संकलन इसी मंच पर, निःशुल्क, उपलब्ध है। PSIR नोट्स (हिंदी) में पाठ्यक्रम के प्रत्येक बिंदु का नोट है — विचारक, सिद्धांत और समालोचना एक ही स्थान पर, IGNOU की शब्दावली से बंधे हुए। PYQ Vault में दस वर्षों का प्रत्येक प्रश्न उत्तर-प्रारूप और हस्तलिखित आदर्श उत्तर के साथ है। और PSIR & GS2 डेली ब्रीफ़ प्रत्येक कार्यदिवस उस दिन के समसामयिक विकास को पाठ्यक्रम के बिंदु से जोड़ता है। पुस्तकें आधार देती हैं; उनका संकलन और प्रतिदिन का अद्यतन — दोनों यहाँ एक साथ चलते हैं। इसलिए तैयारी का व्यावहारिक क्रम यह बनता है: स्रोत से पढ़ना, इसी मंच के नोट से मिलान, और ब्रीफ़ से प्रतिदिन का जोड़।
चार चरण
NCERT (हिंदी) और आधिकारिक हिंदी पाठ्यक्रम साथ-साथ। प्रत्येक अध्याय को पाठ्यक्रम के उस बिंदु से जोड़कर पढ़ा जाए जिसके अंतर्गत वह आता है — यह अभ्यास आगे उत्तर-लेखन में विषय-भटकाव रोकता है।
खंडवार गहराई — विचारक, सिद्धांत और उनकी समालोचना। IGNOU की इकाइयों से पारिभाषिक शब्द पक्के होते हैं; प्रचलित पुस्तकें चुने हुए टॉपिक का विस्तार देती हैं। इसी चरण में हिंदी नोट्स से प्रत्येक टॉपिक का ढांचा मिलान किया जाए।
टॉपिक पूरा होते ही उसके विगत वर्षों के प्रश्न। उत्तर का ढांचा — भूमिका में अवधारणा और विचारक, मुख्य भाग में सिद्धांत और समालोचना, समकालीन उदाहरण, और निष्कर्ष में संतुलित मत। लेखन-अभ्यास आरंभ से ही हिंदी में हो, अनुवाद करके नहीं।
नोट्स का संक्षेपण, विचारकों और उद्धरणों की सूची, और समयबद्ध लेखन। डेली ब्रीफ़ इस चरण में समसामयिक जोड़ का काम करता है — प्रत्येक ब्रीफ़ पाठ्यक्रम के बिंदु से जुड़ा होता है।
हिंदी माध्यम की विशेष बातें
पारिभाषिक शब्द का एक ही हिंदी रूप पूरी तैयारी में चले — स्रोत बदलने पर शब्द न बदले। पहले प्रयोग पर कोष्ठक में अंग्रेज़ी मूल — वैधता (Legitimacy) — उसके बाद हिंदी शब्द अकेला। विचारकों के नाम देवनागरी में, पहले उल्लेख पर कोष्ठक में रोमन — जैसे ग्राम्स्की (Gramsci)। संक्षिप्तियाँ (UN, WTO, SAARC) रोमन लिपि में ही। उद्धरण मूल अंग्रेज़ी में मान्य हैं। वाक्य सीधे हिंदी में सोचकर लिखा जाए — अंग्रेज़ी वाक्य का शब्दशः अनुवाद शैली बिगाड़ता है।
