Scrolling through over here I saw a discssion thread for every year but didn't find one for the next year.
So, this thread is dedicated to the discssions regarding CSE 2024. Anyone planning to appear for the exam next year can join the discussion.
Looking at the level of paper and kind of questions asked this year, I believe we are going to need a lot of support from each other. Hopefully this thread will grow and help a lot of aspirants, both old and new.
We can do it.
Hey I have a doubt which is troubling me can someone share their insights or similar experience
So in civil engineering optional I attempted Q 1/3/5/7/8 but by mistake I attempted Q 2(b) partly,wrote around less than a page and left it
I didn't attempt other parts of Q 2 but forgot to strike it off.
Now the rules say that attempt will be counted sequentially.Technically even if I wrote less than a page it is an attempt but are there any chances that the examiner might show humane considerations?
In other questions, without scaling,I would be getting 35-45 marks out of 50 but in Q 2 I would be getting only 2 marks
Anyone having similar experience or want to give any input?
TIA
It's going to be sequential. People have lost marks due to this unfortunately afaik.
On a break from exams.
Result next week.
Wishing you best of luck.
All the best to everyone.
Needless to say, I am damn scared.
Result aayenge jaayenge bhai logo bs darna nahi hai
दुर्गम वनों और ऊँचे पर्वतों को जीतते हुए
जब तुम अंतिम ऊँचाई को भी जीत लोगे—
जब तुम्हें लगेगा कि कोई अंतर नहीं बचा अब
तुममें और उन पत्थरों की कठोरता में
जिन्हें तुमने जीता है—
जब तुम अपने मस्तक पर बर्फ़ का पहला तूफ़ान झेलोगे
और काँपोगे नहीं—
तब तुम पाओगे कि कोई फ़र्क़ नहीं
सब कुछ जीत लेने में
और अंत तक हिम्मत न हारने में।
Result aayenge jaayenge bhai logo bs darna nahi hai
दुर्गम वनों और ऊँचे पर्वतों को जीतते हुए
जब तुम अंतिम ऊँचाई को भी जीत लोगे—
जब तुम्हें लगेगा कि कोई अंतर नहीं बचा अब
तुममें और उन पत्थरों की कठोरता में
जिन्हें तुमने जीता है—
जब तुम अपने मस्तक पर बर्फ़ का पहला तूफ़ान झेलोगे
और काँपोगे नहीं—
तब तुम पाओगे कि कोई फ़र्क़ नहीं
सब कुछ जीत लेने में
और अंत तक हिम्मत न हारने में।
कुछ लोग तुम्हें समझाएँगे
वो तुम को ख़ौफ़ दिलाएँगे
जो है वो भी खो सकता है
इस राह में रहज़न हैं इतने
कुछ और यहाँ हो सकता है
कुछ और तो अक्सर होता है
पर तुम जिस लम्हे में ज़िंदा हो
ये लम्हा तुम से ज़िंदा है
ये वक़्त नहीं फिर आएगा
तुम अपनी करनी कर गुज़रो
जो होगा देखा जाएगा
Result aayenge jaayenge bhai logo bs darna nahi hai
दुर्गम वनों और ऊँचे पर्वतों को जीतते हुए
जब तुम अंतिम ऊँचाई को भी जीत लोगे—
जब तुम्हें लगेगा कि कोई अंतर नहीं बचा अब
तुममें और उन पत्थरों की कठोरता में
जिन्हें तुमने जीता है—
जब तुम अपने मस्तक पर बर्फ़ का पहला तूफ़ान झेलोगे
और काँपोगे नहीं—
तब तुम पाओगे कि कोई फ़र्क़ नहीं
सब कुछ जीत लेने में
और अंत तक हिम्मत न हारने में।
कुछ लोग तुम्हें समझाएँगे
वो तुम को ख़ौफ़ दिलाएँगे
जो है वो भी खो सकता है
इस राह में रहज़न हैं इतने
कुछ और यहाँ हो सकता है
कुछ और तो अक्सर होता है
पर तुम जिस लम्हे में ज़िंदा हो
ये लम्हा तुम से ज़िंदा है
ये वक़्त नहीं फिर आएगा
तुम अपनी करनी कर गुज़रो
जो होगा देखा जाएगा
युद्ध नहीं जिनके जीवन में
वे भी बहुत अभागे होंगे
या तो प्रण को तोड़ा होगा
या फिर रण से भागे होंगे
दीपक का कुछ अर्थ नहीं है
जब तक तम से नहीं लड़ेगा
दिनकर नहीं प्रभा बाँटेगा
जब तक स्वयं नहीं धधकेगा
कभी दहकती ज्वाला के बिन
कुंदन भला बना है सोना
बिना घिसे मेहंदी ने बोलो
कब पाया है रंग सलौना
जीवन के पथ के राही को
क्षण भर भी विश्राम नहीं है
कौन भला स्वीकार करेगा
जीवन एक संग्राम नहीं है।।
अपना अपना युद्ध सभी को
हर युग में लड़ना पड़ता है
और समय के शिलालेख पर
खुद को खुद गढ़ना पड़ता है
सच की खातिर हरिश्चंद्र को
सकुटुम्ब बिक जाना पड़ता
और स्वयं काशी में जाकर
अपना मोल लगाना पड़ता
दासी बनकरके भरती है
पानी पटरानी पनघट में
और खड़ा सम्राट वचन के
कारण काशी के मरघट में
ये अनवरत लड़ा जाता है
होता युद्ध विराम नहीं है
कौन भला स्वीकार करेगा
जीवन एक संग्राम नहीं है।।
हर रिश्ते की कुछ कीमत है
जिसका मोल चुकाना पड़ता
और प्राण पण से जीवन का
हर अनुबंध निभाना पड़ता
सच ने मार्ग त्याग का देखा
झूठ रहा सुख का अभिलाषी
दशरथ मिटे वचन की खातिर
राम जिये होकर वनवासी
पावक पथ से गुजरीं सीता
रही समय की ऐसी इच्छा
देनी पड़ी नियति के कारण
सीता को भी अग्नि परीक्षा
वन को गईं पुनः वैदेही
निरपराध ही सुनो अकारण
जीतीं रहीं उम्रभर बनकर
त्याग और संघर्ष उदाहरण
लिए गर्भ में निज पुत्रों को
वन का कष्ट स्वयं ही झेला
खुद के बल पर लड़ा सिया ने
जीवन का संग्राम अकेला
धनुष तोड़ कर जो लाए थे
अब वो संग में राम नहीं है
कौन भला स्वीकार करेगा
जीवन एक संग्राम नहीं है।।
@Rashmirathi'सब आंख मूंद कर लडते हैं, जय इसी लोक में पाने को,पर, कर्ण जूझता है कोई, ऊंचा सध्दर्म निभाने को,सबके समेत पङिकल सर में, मेरे भी चरण पडेंग़े क्या ?ये लोभ मृत्तिकामय जग के, आत्मा का तेज हरेंगे क्या ?यह देह टूटने वाली है, इस मिट्टी का कब तक प्रमाण ?मृत्तिका छोड ऊपर नभ में भी तो ले जाना है विमान ।कुछ जुटा रहा सामान खमण्डल में सोपान बनाने कोये चार फूल फेंके मैंने, ऊपर की राह सजाने को।
सम्राट बनेंगे धर्मराज,
या पाएगा कुरूराज ताज,
लड़ना भर मेरा काम रहा,
दुर्योधन का संग्राम रहा,
मुझको न कहीं कुछ पाना है
केवल ऋण मात्र चुकाना है
तुच्छ है राज्य क्या है केशव?
पाता क्या नर कर प्राप्त विभव?
चिंता प्रभूत, अत्यल्प हास,
कुछ चाकचिक्य, कुछ क्षण विलास,
पर वह भी यहीं गंवाना है,
कुछ साथ नहीं ले जाना है।
And
मुझे गर्व है खुद के कौशल पे अब चाहे मै मर जाऊंगा,
अरे खुद इश्वर ने जिसको है छला ऐसा सूर्यपुत्र कहाऊंगा
सम्राट बनेंगे धर्मराज,
या पाएगा कुरूराज ताज,
लड़ना भर मेरा काम रहा,
दुर्योधन का संग्राम रहा,
मुझको न कहीं कुछ पाना है
केवल ऋण मात्र चुकाना है
तुच्छ है राज्य क्या है केशव?
पाता क्या नर कर प्राप्त विभव?
चिंता प्रभूत, अत्यल्प हास,
कुछ चाकचिक्य, कुछ क्षण विलास,
पर वह भी यहीं गंवाना है,
कुछ साथ नहीं ले जाना है।
And
मुझे गर्व है खुद के कौशल पे अब चाहे मै मर जाऊंगा,
अरे खुद इश्वर ने जिसको है छला ऐसा सूर्यपुत्र कहाऊंगा
This can go on forever! Message pe karte hain continue. 
सम्राट बनेंगे धर्मराज,
या पाएगा कुरूराज ताज,
लड़ना भर मेरा काम रहा,
दुर्योधन का संग्राम रहा,
मुझको न कहीं कुछ पाना है
केवल ऋण मात्र चुकाना है
तुच्छ है राज्य क्या है केशव?
पाता क्या नर कर प्राप्त विभव?
चिंता प्रभूत, अत्यल्प हास,
कुछ चाकचिक्य, कुछ क्षण विलास,
पर वह भी यहीं गंवाना है,
कुछ साथ नहीं ले जाना है।
And
मुझे गर्व है खुद के कौशल पे अब चाहे मै मर जाऊंगा,
अरे खुद इश्वर ने जिसको है छला ऐसा सूर्यपुत्र कहाऊंगाThis can go on forever! Message pe karte hain continue.
Bilkul 😂😂
Out. 4th attempt,1st Mains. Tbh,messed around big time in the duration between Prelims and Mains. So,had least of expectations.
Though, relieved by the fact that was somehow able to get into State Civil services very recently.So that acts as a solid backup. Don't really know if that acts as a stopover or the ultimate career destination.Baaki,ab energy toh kam hi bacchi hai.
Also,Best of luck to all those who qualified.
Dosto, I am out. 5th attempt, 3rd Mains!
I did my best and I was so proud of the answers I wrote and the Interlinking I did in this Mains examination. My UPSC Journey will end here for I believe I did my best in this attempt and I couldn't have done any better.
No 6th attempt for me! Probably, I will turn into a teacher or maybe I will continue my legal journey as a lawyer ! I will have to take that call soon
This is something I wrote on my telegram channel. I hope that it gives strength to at least some of you or anyone who has faced failure :
"I have got so many of my friends who were crying for me even when I am not at all crying.
Gaitonde’s Den: https://forumias.com/post/detail/Gaitondes-Den-1727638216





