भारत-यूक्रेन संबंध- महत्व और चुनौतियां- बिंदुवार व्याख्या

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युद्धग्रस्त देश में भारतीय प्रधान मंत्री की ऐतिहासिक यात्रा के मद्देनजर भारत-यूक्रेन संबंधों ने महत्वपूर्ण ध्यान आकर्षित किया है। 1992 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद यूक्रेन का दौरा करने वाले नरेंद्र मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं।

यह यात्रा, जिसका उद्देश्य भारत-यूक्रेन संबंधों को गहरा करना है, रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भारत की सुसंगत स्थिति को भी रेखांकित करती है। भारत ने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि स्थायी शांति केवल बातचीत और कूटनीति के माध्यम से हासिल की जा सकती है।

इस लेख में, हम भारत-यूक्रेन संबंधों के बारे में विस्तार से जानेंगे। हम सहयोग के क्षेत्रों, भारत-यूक्रेन में चुनौतियों और इस ऐतिहासिक यात्रा के महत्व पर भी गौर करेंगे।

Source- Indian Express
कंटेंट टेबल
भारत-यूक्रेन संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:

भारत और यूक्रेन के बीच सहयोग के क्षेत्र क्या रहे हैं?

भारत-यूक्रेन संबंधों में चुनौतियाँ:

उभरते अवसर क्या हैं जो भारत-यूक्रेन संबंधों को महत्त्वपूर्ण बनाते हैं?

आगे की राह क्या होनी चाहिए?

भारत-यूक्रेन संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि क्या है?

भारत का यूक्रेन के साथ व्यापक द्विपक्षीय संबंध है, जो सहयोग के सभी क्षेत्रों तक फैला हुआ है।

राजनयिक संबंधों की स्थापनासोवियत संघ के विघटन के बाद यूक्रेन को मान्यता देने वाले पहले देशों में भारत था। भारत ने जनवरी 1992 में यूक्रेन के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए, मई 1992 में कीव में भारत का दूतावास खोला गया। यूक्रेन ने फरवरी 1993 में दिल्ली में अपना दूतावास खोला, जो एशिया में उसका पहला मिशन था।
अनुबंध (Engagement) का चरण लेकिन पूर्णता कि कमीयद्यपि भारत और यूक्रेन ने रक्षा से लेकर प्रवासी समुदाय तक अनेक क्षेत्रों में सहयोग किया है, तथापि रूस के प्रति भारत के पूर्वाग्रह ने नई दिल्ली को यूक्रेन के साथ पूर्ण सहयोग/पूर्ण अनुबंध करने से रोका।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद द्विपक्षीय सहयोग में गिरावटरूस-यूक्रेन युद्ध के बाद द्विपक्षीय संबंधों में गिरावट आई है। उदाहरण के लिए- भारत-यूक्रेन व्यापार 2021-22 में 3.39 बिलियन डॉलर से घटकर 2023-24 में 0.71 बिलियन डॉलर हो गई।

इस यात्रा का उद्देश्य घटते द्विपक्षीय सहयोग को सुधारना और भारत-यूक्रेन संबंधों को गहरा करना है।

भारत और यूक्रेन के बीच सहयोग के क्षेत्र क्या रहे हैं?

  1. भू-राजनीतिक सहयोग

a. यूक्रेन में जन्मे लियोनिद इलिच ब्रेझनेव्ह के नेतृत्व में सोवियत संघ ने पाकिस्तान के खिलाफ 1971 के युद्ध में भारत का समर्थन किया। हिंदी-रूसी भाई-भाई का नारा USSR के यूक्रेनी नेता निकिता ख्रुश्चेव ने दिया था।

b. भारत और यूक्रेन के बीच उच्च स्तरीय यात्राओं और बातचीत का नियमित आदान-प्रदान। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारतीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी और यूक्रेन के राष्ट्रपति श्री वलोडिमिर ज़ेलेंस्की के बीच पूर्व-नियमित टेलीफोन संचार।

c. संयुक्त कार्य समूहों, विदेश कार्यालय परामर्श के माध्यम से भारत और रूस के बीच नियमित बातचीत।

2. सैन्य सहयोग

a. यूक्रेन अपनी आजादी के बाद से ही भारत के लिए सैन्य प्रौद्योगिकी और उपकरणों का स्रोत रहा है। उदाहरण के लिए, यूक्रेन निर्मित वायु से वायु में मार करने वाली R-27 मिसाइलों का उपयोग भारतीय वायु सेना (IAF) द्वारा संचालित SU-30MKI लड़ाकू विमानों पर किया जाता है।

b. रूस के साथ युद्ध के दौरान भारत ने यूक्रेन को रक्षा उपकरण निर्यात करना भी शुरू कर दिया है।

3. आर्थिक सहयोग

a. 2020 में, भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में यूक्रेन का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य और यूक्रेन का पांचवां सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य था।

b. पिछले 25 वर्षों में भारत और यूक्रेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। भारत और यूक्रेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2021-22 में 386 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।

c. यूक्रेन से भारत को निर्यात की मुख्य वस्तुएँ- कृषि उत्पाद, धातुकर्म उत्पाद, प्लास्टिक और पॉलिमर।

भारत से यूक्रेन को निर्यात की मुख्य वस्तुएँ- फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी, रसायन, खाद्य उत्पाद।

d. यूक्रेन में कई भारतीय कंपनियों के प्रतिनिधि कार्यालय हैं। उदाहरण के लिए यूक्रेन में ‘भारतीय दवा निर्माता संघ’ का कार्यालय।

4. मानवीय सहायता

a. भारत ने यूक्रेन-रूस युद्ध के मद्देनजर यूक्रेन को 99.3 टन मानवीय सहायता की 12 खेपें भेजी हैं। सहायता में दवाइयां, कंबल, टेंट, तिरपाल, चिकित्सा उपकरण शामिल हैं।

b. भारतीय फार्मास्युटिकल कंपनियों ने यूक्रेन को 8 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की चिकित्सा सहायता और वित्तीय सहायता प्रदान की है।

5. प्रवासी सहयोग

a. स्थानीय भारतीय समुदाय में ज्यादातर व्यावसायिक पेशेवर और चिकित्सा का अध्ययन करने वाले छात्र शामिल हैं। भारतीय व्यावसायिक पेशेवर मुख्य रूप से विनिर्माण, पैकेजिंग, व्यापार और सेवा उद्योग में लगे हुए हैं।

b. स्थानीय भारतीय समुदाय ने “इंडिया क्लब” नामक एक संघ बनाया है जो सांस्कृतिक और खेल कार्यक्रमों का आयोजन करता है।

6. सांस्कृतिक सहयोग

a. देश भर में फैले 30 से अधिक यूक्रेनी सांस्कृतिक संघ/समूह भारतीय कला, योग, दर्शन, आयुर्वेद और आध्यात्मिकता को बढ़ावा देने में लगे हुए हैं। उदाहरण के लिए योग दिवस और महात्मा गांधी की जयंती मनाना।

b. यूक्रेन में भारतीय फिल्मों की शूटिंग. उदाहरण के लिए- प्रतिष्ठित ऑस्कर विजेता गाना नाटू-नाटू यूक्रेन में शूट किया गया था।

7. संस्थागत सहयोग

a. ITEC (भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग) कार्यक्रम, जो भारत में उत्कृष्टता के विभिन्न केंद्रों में प्रशिक्षण या क्षमता निर्माण कार्यक्रम प्रदान करता है।

b. ICCR (भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद) छात्रवृत्ति, जो प्रतिष्ठित भारतीय संस्थानों में विषयों की विस्तृत श्रृंखला को कवर करने वाले उच्च-स्तरीय पाठ्यक्रम प्रदान करती है।

c. केन्द्रीय हिंदी संस्थान छात्रवृत्ति कार्यक्रम, जो यूक्रेन के छात्रों को उच्च स्तरीय हिंदी भाषा पाठ्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए छात्रवृत्ति प्रदान करता है।

भारत-यूक्रेन संबंधों में चुनौतियाँ क्या हैं ?

a. द्विपक्षीय व्यापार में गिरावट- रूस-यूक्रेन संकट के कारण भारत-यूक्रेन व्यापार 2021-22 में 39 बिलियन डॉलर से घटकर 2023-24 में 0.71 बिलियन डॉलर हो गई है।

b. भारत के आयात पर असर- व्यापार में गिरावट का असर भारत के यूक्रेन से कृषि, मशीन-निर्माण और सैन्य सामान के आयात पर पड़ा है। उदाहरण के लिए, सूरजमुखी तेल की आपूर्ति श्रृंखला पर प्रभाव के कारण देश में मुद्रास्फीति बढ़ गई है।

c. रूस के साथ भारत के संबंध- रूस के साथ भारत के निरंतर जुड़ाव और मॉस्को की सभी सार्वजनिक आलोचनाओं से बचने के निर्णय के कारण भारत-यूक्रेन भू-राजनीतिक सहयोग की भावना थोड़ी कम हो गई है।

d. अतीत में यूक्रेन द्वारा भारत की नीतियों की आलोचना – भारत के परमाणु परीक्षण और भारत की कश्मीर नीति की यूक्रेन द्वारा आलोचना भी यूक्रेन के साथ भारत के पूर्ण संबंधों में बाधा बनी रही है।

वे कौन से उभरते अवसर हैं जो भारत-यूक्रेन संबंधों को महत्वपूर्ण बनाते हैं?

यूक्रेन में युद्धोपरांत पुनर्निर्माण की संभावना भारत के लिए विभिन्न अवसर प्रदान करती है।

  1. उन्नत रक्षा सहयोग की सम्भावना- यूक्रेन की हथियारों की तत्काल आवश्यकता भारत के लिए लगभग अप्रचलित सोवियत हथियारों को त्यागने का अवसर पैदा करती है। भारत अपने सोवियत हार्डवेयर और गोला-बारूद को पश्चिमी गोला-बारूद से बदल सकता है, क्योंकि भारत सोवियत और रूसी हथियारों से दूर नाटो प्रणालियों की ओर रुख कर रहा है।
  2. हिंद महासागर में भू-रणनीतिक सहयोग- यूक्रेन के साथ सैन्य सहयोग भारत के लिए विशेष रूप से हिंद महासागर में एक रणनीतिक गेम-चेंजर हो सकता है। यूक्रेन की आधुनिक, कम लागत और अभिनव जलजनित तकनीक ने रूस के बेहद बेहतर काला सागर बेड़े को पछाड़ दिया। भारत हिंद महासागर क्षेत्र में चीन का मुकाबला करने के लिए यूक्रेन की विशेषज्ञता का उपयोग कर सकता है।
  3. उत्पादन अड्डों का भारत में स्थानांतरण- भारत और यूक्रेन के बीच घनिष्ठ सहयोग भारत में यूक्रेनी विनिर्माण कंपनियों के उत्पादन अड्डों को स्थानांतरित करने में मदद कर सकता है। उदाहरण के लिए- गैस टरबाइन निर्माण कंपनी के स्थानांतरण, भारत में ज़ोर्या-मैशप्रोक्ट का आधार।
  4. रोजगार के अवसरों में वृद्धि- यूक्रेन का भविष्य का पुनर्निर्माण भारत के तनावपूर्ण श्रम बाजार के लिए बड़े अवसर प्रदान करेगा।
  5. डिजिटल क्षेत्र में सहयोग की वृद्धि- यूक्रेन के साथ भारत के गहरे संबंध, दोनों देशों के बीच डिजिटल सहयोग को बढ़ा सकते हैं और दोनों देशों के शासन के लिए गेम चेंजर हो सकते हैं। पूर्व भारतीय इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें युद्ध के समय यूक्रेन के लिए अमूल्य साबित हो सकती हैं, जबकि यूक्रेन का अभूतपूर्व DIIA ऐप, जो सरकारी दस्तावेजों और सेवाओं को किसी के स्मार्ट फोन में सुरक्षित रूप से रखता है, भारतीय शासन में क्रांति ला सकता है।

आगे का रास्ता क्या होना चाहिए ?

  1. कूटनीतिक संतुलन का कठोर नियम- भारत को रूस और यूक्रेन तथा चीन और अमेरिका के साथ अपने संबंधों में कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना चाहिए। भारत को यूक्रेन के साथ अपने संबंधों को रूस के साथ अपने समीकरणों में बदलाव नहीं करने देना चाहिए, क्योंकि चीन के साथ रूस के संबंधों का भारत के साथ उसके संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ता है।
  2. शांति स्थापित करने के लिए केंद्रीय भूमिका निभाएं- भारत को एक शांतिप्रिय लेकिन सिद्धांतवादी वैश्विक खिलाड़ी के रूप में केंद्रीय भूमिका निभानी चाहिए और यूक्रेनी शांति फार्मूले की वार्ता में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। इससे वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं को बहाल करने और दुनिया में भुखमरी से होने वाली लाखों मौतों को रोकने में मदद मिलेगी।
  3. गुटनिरपेक्षता की नई परिभाषा का प्रदर्शन- भारत को यूक्रेन के साथ अपने संबंधों को गहरा करते हुए रूस के साथ अपने घनिष्ठ सहयोग को बनाए रखते हुए भारत की विदेश नीति में गुटनिरपेक्षता की बदली हुई परिभाषा का प्रदर्शन करना चाहिए। भारतीय विदेश नीति में गुटनिरपेक्षता की परिभाषा सभी देशों से समान दूरी बनाए रखने से बदलकर सभी देशों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखने में बदल गई है।

रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष ने भारत को एक नाजुक स्थिति में डाल दिया है, जिसके लिए उसे रूस के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों और पश्चिम के साथ अपनी बढ़ती साझेदारी के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता है। भारत को इस भू-राजनीतिक दलदल में रणनीतिक रूप से आगे बढ़ना चाहिए।

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