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जब देश बढ़ती लागत और बुनियादी ढांचे के एजेंडे को लागू करने में जटिल विनियामक बाधाओं की दोहरी चुनौतियों से जूझ रहे हैं, तो भारत ने एक परिवर्तनकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म- प्रगति पोर्टल के माध्यम से बुनियादी ढांचे के प्रबंधन में क्रांति ला दी है । हाल ही में ऑक्सफोर्ड के एक अध्ययन ने डिजिटल शासन, विशेष रूप से बुनियादी ढांचे और सामाजिक विकास में इसकी उत्कृष्ट भूमिका के लिए भारत के प्रगति मंच की प्रशंसा की है।

| कंटेंट टेबल |
| प्रगति पोर्टल क्या है? प्रगति प्लेटफॉर्म की सफलताएं क्या रही हैं? बुनियादी ढांचे की निगरानी के लिए अन्य पूरक प्लेटफॉर्म कौन से हैं? प्रगति ग्लोबल साउथ के लिए क्या सबक प्रदान करती है? निष्कर्ष |
प्रगति पोर्टल क्या है?
प्रगति पोर्टल- डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के एक भाग के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2015 में प्रगति (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया था। इस पोर्टल का प्रबंधन प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा किया जाता है और इसका उद्देश्य एक संरचित समीक्षा प्रक्रिया के माध्यम से परियोजना कार्यान्वयन में अक्षमताओं को दूर करना है।
प्रगति के उद्देश्य:
a. यह अभिनव मंच विभिन्न सरकारी विभागों के बीच संचार में सुधार करके और देश भर में परियोजनाओं के समय पर निष्पादन को सुनिश्चित करके शासन को बढ़ाने के लिए बनाया गया है।
c. यह राज्य सरकारों द्वारा पहचाने गए कार्यक्रमों और परियोजनाओं के साथ-साथ भारत सरकार के प्रमुख कार्यक्रमों और परियोजनाओं की निगरानी और समीक्षा भी करता है।
b. यह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, ड्रोन मॉनिटरिंग और डेटा प्रबंधन जैसे डिजिटल उपकरणों के साथ नेतृत्व को जोड़ता है।
प्रगति की मुख्य विशेषताएं
| त्रि-स्तरीय प्रणाली | प्रगति पोर्टल तीन-स्तरीय संरचना पर काम करता है, जिससे सरकारी परियोजनाओं की प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन संभव हो पाता है। |
| मासिक समीक्षा | प्रत्येक माह के चौथे बुधवार को एक मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की जाती है, जिसे “प्रगति दिवस” कहा जाता है, जहां प्रधानमंत्री चल रहे कार्यक्रमों और सार्वजनिक शिकायतों से संबंधित मुद्दों की समीक्षा करते हैं। |
| वास्तविक समय में निगरानी | यह प्लेटफॉर्म परियोजना की प्रगति पर वास्तविक समय में नज़र रखने की सुविधा प्रदान करता है, जिससे देरी और समस्याओं की शीघ्र पहचान संभव हो पाती है। |
प्रगति प्लेटफॉर्म की सफलताएं क्या रही हैं?
- विलंबित परियोजनाओं का तेजी से पूरा होना- राष्ट्रीय राजमार्ग 8, चिनाब ब्रिज (दुनिया का सबसे ऊंचा रेल पुल) और असम में बोगीबील ब्रिज जैसी परियोजनाएं, जो पहले वर्षों से विलंबित थीं, प्रगति के अंतर्गत तेजी से पूरी की गईं।
- बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का त्वरित समापन- प्रगति पहल ने लगभग 205 बिलियन डॉलर की लागत की 340 से अधिक प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति दी है।
- नेतृत्व-संचालित जवाबदेही- प्रगति बैठक में प्रधानमंत्री और राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्रीय मंत्रालयों के अधिकारियों सहित प्रमुख हितधारकों की शीर्ष-स्तरीय भागीदारी ने बुनियादी ढांचे को राष्ट्रीय प्राथमिकता बना दिया है, जिससे नौकरशाही प्रक्रियाओं में तात्कालिकता और जवाबदेही आ गई है।
- केन्द्र-राज्य सहयोग में वृद्धि- इस मंच ने राजनीतिक सीमाओं के पार अपनी उपयोगिता साबित की है, तथा राज्यों में उनकी सत्तारूढ़ पार्टी की परवाह किए बिना प्रगति को सुगम बनाया है। उदाहरण के लिए-बोगीबील पुल के निर्माण में प्रगति के अंतर्गत राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के बीच अभूतपूर्व सहयोग ।
- सामाजिक विकास पहलों का विस्तार- प्रगति का प्रभाव सामाजिक विकास पहलों तक फैला हुआ है, जैसे ग्रामीण विद्युतीकरण में तेजी और लाखों लोगों को नल के पानी के कनेक्शन प्रदान करना। यह एकीकृत दृष्टिकोण भौतिक और सामाजिक बुनियादी ढांचे की जरूरतों को पूरा करने के लिए डिजिटल शासन की क्षमता को दर्शाता है।
- सकारात्मक आर्थिक प्रभाव- भारत का डिजिटल गवर्नेंस मॉडल आर्थिक रूप से प्रभावशाली साबित हुआ है, अध्ययनों से पता चलता है कि बुनियादी ढांचे के निर्माण पर खर्च किए गए प्रत्येक रुपए से 2.5 से 3.5 रुपए का GDP लाभ होता है।
बुनियादी ढांचे की निगरानी के लिए अन्य पूरक प्लेटफार्म कौन से हैं?
भारत ने 2021 में भू-स्थानिक नियोजन के लिए पीएम गति शक्ति और पर्यावरण मंजूरी को सुव्यवस्थित करने के लिए परिवेश जैसे पूरक प्लेटफॉर्म पेश किए। प्रगति, पीएम गति शक्ति और परिवेश मिलकर बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक मजबूत डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र बनाते हैं। इन प्लेटफार्मों ने मंजूरी के समय को काफी हद तक कम कर दिया है – 600 दिनों से घटाकर 70-75 दिन कर दिया है – और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करते हुए परियोजना डिजाइन को अनुकूलित किया है।
| पीएम गति शक्ति | पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PMGS-NMP) लॉन्च किया गया। इसका फोकस भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की योजना बनाने, नवीन तरीकों से वित्तपोषण करने, प्रौद्योगिकी के उपयोग और तेजी से क्रियान्वयन पर होगा। |
| परिवेश | परिवेश एक एकल खिड़की एकीकृत पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली है, जिसे प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए ‘डिजिटल इंडिया’ की भावना के अनुसरण में विकसित किया गया है और इसमें न्यूनतम सरकार और अधिकतम शासन का सार समाहित है। इसका उद्देश्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की पर्यावरणीय मंजूरी को सुव्यवस्थित करना है। |
प्रगति वैश्विक दक्षिण के लिए क्या सबक प्रदान करती है?
प्रगति अन्य देशों के लिए महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करती है, विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण में, जहां तेजी से शहरीकरण और जनसंख्या वृद्धि के कारण बुनियादी ढांचे की चुनौतियां और भी बढ़ गई हैं।
- सतत नेतृत्व- भारत में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए शीर्ष से सतत नेतृत्व आवश्यक है ।
- अंतर-सरकारी सहयोग- बुनियादी ढांचे की निगरानी के लिए डिजिटल प्लेटफार्मों को स्थानीय स्वायत्तता का सम्मान करते हुए अंतर-सरकारी सहयोग को सक्षम करना चाहिए।
- कई उपकरणों का संयोजन- बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में परियोजना की निगरानी बढ़ाने के लिए ड्रोन निगरानी और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसे कई तकनीकी उपकरणों को संयोजित किया जाना चाहिए।
- प्रमुख पहलों के लिए मंच का अनुकरण- प्रगति का दृष्टिकोण अफ्रीका में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए अफ्रीका के कार्यक्रम (PIDA) जैसी पहलों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है, जिसका उद्देश्य सीमा पार परियोजनाओं के माध्यम से महाद्वीप के बुनियादी ढांचे के अंतर को पाटना है।
निष्कर्ष
भारत की प्रगति इस बात का उदाहरण है कि कैसे प्रौद्योगिकी को दूरदर्शी नेतृत्व के साथ जोड़कर बुनियादी ढांचे के विकास में परिवर्तनकारी बदलाव लाया जा सकता है, जो दुनिया भर में उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक मॉडल के रूप में काम करता है। यह प्रदर्शित करके कि कैसे डिजिटल शासन और नेतृत्व बाधाओं को दूर कर सकता है, प्रगति दुनिया भर में जवाबदेही, पारदर्शिता और प्रभावी संसाधन उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक परखा हुआ खाका प्रदान करती है।
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