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हाल ही में, भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने घोषणा की कि भारत और चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गश्त व्यवस्था (patrolling arrangements) के समझौते पर पहुंच गए हैं। भारत-चीन LAC समझौते का उद्देश्य 2020 में चीनी अतिक्रमण से उत्पन्न सीमा मुद्दों को हल करना है। हालांकि, पूर्वी लद्दाख में डेमचोक और देपसांग में लंबे समय से चले आ रहे “विरासत विवादों” पर चिंता के बादल बने हुए हैं।

| कंटेंट टेबल |
| हाल ही में भारत-चीन LAC समझौते के प्रमुख पहलू क्या है? भारत-चीन संबंधों के लिए समझौते के निहितार्थ क्या हैं? भारत-चीन सीमा विवाद को हल करने में क्या चुनौतियाँ हैं? आगे की राह क्या होनी चाहिए? |
हाल ही में भारत-चीन LAC समझौते के प्रमुख पहलू:
- गश्त प्रोटोकॉल (Patrolling Protocols)- समझौता दोनों देशों को पहले से स्थापित मार्गों पर गश्त फिर से शुरू करने की अनुमति देता है। समझौते का प्रभावी लक्ष्य 2020 में तनाव बढ़ने से पहले की यथास्थिति पर लौटना है।
- पीछे हटने की प्रक्रिया (Disengagement Process)– समझौते में पीछे हटने की प्रक्रिया को भी पूरा करने का प्रावधान है, जो पिछले चार वर्षों से बातचीत का केंद्र बिंदु रहा है।
- सैन्य उपस्थिति में कमी (Reduction of Military Presence)– समझौते के अनुसार, भारत और चीन दोनों टकराव को रोकने के लिए अपनी सेनाओं को वर्तमान स्थिति से थोड़ा पीछे हटा देंगे। नए प्रोटोकॉल का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी और समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी।
भारत-चीन संबंधों पर समझौते के क्या निहितार्थ हैं?
वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को लेकर भारत और चीन के बीच हालिया समझौते का भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों पर महत्वपूर्ण प्रभाव है।
- तनाव में कमी (De-escalation of Tensions)- यह समझौता उस क्षेत्र में तनाव को कम करने की दिशा में एक कदम है जहां दोनों देशों ने भारी सैन्य उपस्थिति बनाए रखी है। यह समझौता गलवान 2020 जैसे टकराव की संभावना को कम करता है और सीमा पर अधिक स्थिर वातावरण को बढ़ावा देता है।
- राजनयिक संबंधों की बहाली (Restoration of Diplomatic Relations)– समझौते के सफल कार्यान्वयन से ब्रिक्स, SCO जैसे मंचों पर उच्च-स्तरीय राजनयिक व्यस्तताओं को फिर से शुरू करने में मदद मिल सकती है।
- आर्थिक और व्यापार संबंध (Economic and Trade Relations)– सैन्य बातचीत के सामान्य होने से भारत और चीन के बीच बेहतर आर्थिक संबंधों का मार्ग प्रशस्त होगा। उदाहरण के लिए- उड़ानों की बहाली और भारत में चीनी निवेश में वृद्धि।
- क्षेत्रीय स्थिरता पर प्रभाव (Influence on Regional Stability)– एक स्थिर भारत-चीन संबंध एशिया में अन्य क्षेत्रीय विवादों को हल करने के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है। उदाहरण के लिए- पड़ोसी देशों के बीच चीन की सीमा नीतियों की धारणा में बदलाव।
- दीर्घकालिक क्षेत्रीय विवाद समाधान का मार्ग (Path for Long-term Territorial Dispute Resolution)– LAC समझौता भविष्य में देपसांग और डेमचोक जैसे ‘विरासत सीमा मुद्दों’ के समाधान का मार्ग प्रशस्त करेगा।
भारत-चीन सीमा विवाद को हल करने में क्या चुनौतियाँ हैं?

- ऐतिहासिक असहमति और ‘विरासत के मुद्दे‘ (Historical Disagreements and ‘Legacy Issues’)- भारत-चीन सीमा विवाद का एक लंबा और जटिल इतिहास है जो 1962 के सीमा युद्ध से शुरू होता है। डेपसांग मैदान और डेमचोक पर विवाद जैसे ‘विरासत के मुद्दों’ की उपस्थिति, भारत-चीन सीमा विवाद के प्रभावी समाधान में एक बड़ी चुनौती है।
- एकतरफा चीनी कार्रवाई (Unilateral Chinese actions)- भारतीय क्षेत्र में सैन्य घुसपैठ सहित LAC के साथ यथास्थिति को एकतरफा रूप से बदलने के चीन के प्रयासों ने अतीत में तनाव और जटिल समाधान प्रयासों को काफी बढ़ा दिया है।
- सामरिक चिंताएं और राष्ट्रवादी भावनाएं (Strategic concerns and nationalistic sentiments)– विवादित क्षेत्र का रणनीतिक महत्व, दोनों पक्षों की राष्ट्रवादी भावनाओं के साथ मिलकर, सरकार के लिए क्षेत्र से समझौता करना या स्वीकार करना अधिक कठिन बना देता है।
- सैन्य निर्माण और बुनियादी ढांचे का विकास (Military build-up and infrastructure development)– भारत और चीन दोनों द्वारा LAC पर सैन्य उपस्थिति और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना विवाद के प्रभावी समाधान में जटिलता की परत को जोड़ता है।
- विश्वास की कमी और आपसी संदेह (Lack of trust and mutual suspicion)– 2020 में गलवान घाटी में हुई घातक झड़पों ने दोनों देशों के बीच विश्वास के स्तर पर गहरा प्रभाव डाला है, जिससे संदेह और अनिश्चितता बढ़ गई है। विश्वास की यह कमी एक अस्थिर वातावरण बनाती है जो दीर्घकालिक संघर्ष समाधान के लिए अनुकूल नहीं है।
- बफर जोन में असंतुलन (Imbalance in buffer zones)– विघटन प्रक्रिया के दौरान बफर जोन की स्थापना के परिणामस्वरूप भारत को चीन की तुलना में अधिक क्षेत्र खोना पड़ा। यह असंतुलन और अधिक तनाव पैदा करता है और संघर्ष समाधान को और अधिक कठिन बना देता है।
आगे की राह क्या होनी चाहिए?
- निरंतर संवाद और वार्ता (Continued dialogue and negotiations)– दोनों देशों को उच्च स्तरीय वार्ता जारी रखनी चाहिए, बातचीत और आपसी समझ की सुविधा के लिए संवाद चैनल खुले रखने चाहिए। भविष्य में LAC पर तनाव कम करने के लिए सैन्य, राजनीतिक और कूटनीतिक बातचीत जारी रखी जानी चाहिए।
- विश्वास की स्थापना (Establishment of trust)– दोनों देशों को सक्रिय रूप से उन कार्यों से बचना चाहिए जो स्थिति को बढ़ा सकते हैं, जैसे यथास्थिति को बदलने के एकतरफा प्रयास, और आपसी सम्मान और समझ के माहौल को बढ़ावा देने की दिशा में काम करना चाहिए।
- विरासत के मुद्दों को हल करें (Resolve legacy issues)– अनसुलझे सीमा दावों सहित विरासत के मुद्दों को LAC वार्ता में भविष्य के कदम के रूप में संबोधित किया जाना चाहिए। इससे सीमा विवाद का व्यापक समाधान सुनिश्चित हो सकेगा।’
- संतुलित विघटन (Balanced disengagement)– भविष्य के विघटन का लक्ष्य संतुलन बनाना चाहिए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि बफर जोन के निर्माण में कोई भी पक्ष असंगत रूप से क्षेत्र नहीं खोएगा। इससे संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी और दीर्घकालिक शांतिपूर्ण समाधान में योगदान मिलेगा।
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